पालघर (मनोर): पालघर जिले के मनोर थाना क्षेत्र अंतर्गत आंवढानी ग्राम पंचायत के चिल्हार गांव में लंबे समय से चला आ रहा जमीन विवाद अब खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह विवाद अब केवल जमीन का नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जिस जमीन के असली मालिक सरकारी दस्तावेजों में किशोर जयंतीलाल शाह और जयूर किशोर शाह हैं, उसी जमीन पर कब्जे को लेकर हुए आपसी झगड़े ने अपनों को ही जान का दुश्मन बना दिया है।
कल के साथी, आज आमने-सामने
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विवादित जमीन पर काबिज अधिकांश परिवारों ने जमीनी सच्चाई और कानूनी दस्तावेजों (सातबारा) को स्वीकार करते हुए स्वेच्छा से कब्जा छोड़ दिया है। हालांकि, कुछ लोग अभी भी इस पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इसी वैचारिक मतभेद और हठ के कारण गांव का आपसी भाईचारा समाप्त हो रहा है, जिसका नतीजा रविवार को हुई हिंसक झड़प के रूप में सामने आया।
मेडिकल रिपोर्ट और मारपीट के साक्ष्य
दिनांक 3 मई 2026 की शाम, चिल्हार सांबरे पाडा में हुई घटना में संतोष सांबरे को गंभीर चोटें आई हैं। मनोर ग्रामीण अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट (E85) में संतोष के शरीर पर हुए प्रहारों को ‘Assault’ (हमला) की श्रेणी में रखा गया है। अस्पताल से प्राप्त तस्वीरों में संतोष के चेहरे और नाक पर गहरे जख्म साफ देखे जा सकते हैं, जो घटना की भयावहता को प्रमाणित करते हैं।
पुलिस जांच पर सुलगते सवाल: 10 हमलावर, पर NCR सिर्फ 2 पर?
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली अब गंभीर सवालों के घेरे में है। पीड़ित संतोष सांबरे और उनके परिवार द्वारा यह सीधा आरोप लगाया जा रहा है कि इस जानलेवा हमले में करीब 10 लोग शामिल थे। परिवार का कहना है कि भीड़ ने उन्हें घेरकर मारा और उन्होंने पुलिस को सभी हमलावरों के नाम भी बताए हैं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मनोर पुलिस ने सिर्फ 2 लोगों को ही नामजद किया है।
इतना ही नहीं, मामले को उलझाने के लिए दूसरे पक्ष की ओर से ‘क्रॉस कंप्लेंट’ (जवाबी शिकायत) भी दर्ज कराई गई है। आखिर बाकी के 8 हमलावरों को कानूनी कार्रवाई से क्यों बचाया जा रहा है? क्या पुलिस किसी रसूखदार के दबाव में काम कर रही है या यह जांच में बड़ी कोताही है? पीड़ित परिवार अब न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
प्रशासन और राजस्व विभाग के लिए ‘रेड अलर्ट’
राजस्व विभाग के सातबारा के अनुसार जमीन गट क्रमांक 39/4 के वास्तविक स्वामी पिता किशोर जयंतीलाल शाह और उनके पुत्र जयूर किशोर शाह हैं। कानून और कागजों के स्पष्ट होने के बावजूद राजस्व विभाग की सुस्ती ने इस विवाद को हवा दी है। यह स्थिति शासन-प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि पालघर जिला प्रशासन और मनोर पुलिस ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाले समय में यहाँ इससे भी बड़ी हिंसक घटना घटने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
पीड़ित संतोष सांबरे और उनके परिवार की प्रमुख मांगें:
पुलिस प्रशासन से मांग: परिवार की मांग है कि पुलिस उन सभी 10 हमलावरों को तत्काल गिरफ्तार करे जो घटना में शामिल थे। क्रॉस कंप्लेंट की आड़ में असली गुनहगारों को बचने का मौका न दिया जाए।
राजस्व विभाग (तहसीलदार) से मांग: पीड़ित पक्ष और भू-स्वामियों की अपील है कि तहसीलदार (पालघर) और भूमि अभिलेख विभाग (Land Records) तुरंत हस्तक्षेप कर गट क्रमांक 39/4 का आधिकारिक सीमांकन (Measurement) सुनिश्चित करें।
उप-विभागीय अधिकारी (SDO) से हस्तक्षेप की अपील: प्रशासन सातबारा के आधार पर वास्तविक स्वामियों को पुलिस सुरक्षा में मालिकाना कब्जा दिलाए ताकि इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके और भविष्य की किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी प्रशासन पर न आए।
- विशेष खोज रिपोर्ट, हिंद आवाज मीडिया।
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