पालघर: शिरगाव के गडगपाडा गांव में हाल ही में हुई हिंसक घटना को लेकर पालघर जिला प्रशासन ने अपनी स्थिति साफ की है। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया माध्यमों पर चल रही खबरों को भ्रामक बताते हुए प्रशासन ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। जिला प्रशासन ने साफ किया है कि इस घटना को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे अधूरे और गलत तथ्यों पर आधारित हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लोकतांत्रिक लोकराज्यम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितकुमार चौधरी ने गडगपाडा की एक खदान (सर्वे नंबर 328/8/अ) के खिलाफ पीजी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत की जांच के लिए वसई के तहसीलदार ने विरार के मंडल अधिकारी (सर्कल ऑफिसर) प्रभाकर पाटिल को मौके पर जाकर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे।
12 मई 2026 को जब मंडल अधिकारी प्रभाकर पाटिल जांच के लिए पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि वहां मौजूद क्रेशर यूनिट पहले से ही सील थे। जब वे आगे बढ़ रहे थे, तब तीन मोटरसाइकिलों पर आए कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी का पीछा किया। अधिकारी ने फोन पर शिकायतकर्ता को बताया कि खदान बंद है। इस पर शिकायतकर्ता ने उन्हें रुकने को कहा और अपने प्रतिनिधि आत्माराम पाटिल को मौके पर भेजा।
जब आत्माराम पाटिल वहां पहुंचे और वे अधिकारी के साथ आगे बढ़े, तभी मोटरसाइकिल सवारों ने उन्हें रोक लिया और आत्माराम पाटिल की गाड़ी की चाबी छीन ली। इसके बाद खदान मालिक महेश पाटिल, उनके परिवार और कुछ अन्य लोगों के बीच विवाद बढ़ गया। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, इन लोगों ने अधिकारी प्रभाकर पाटिल और आत्माराम पाटिल पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। इस हमले में प्रभाकर पाटिल किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहे, लेकिन गंभीर चोटों के कारण आत्माराम पाटिल की मौत हो गई।
इस मामले में पुलिस ने भालचंद्र लक्ष्मण पाटिल, महेश भालचंद्र पाटिल, प्रताप भालचंद्र पाटिल, निकेतन महेश पाटिल और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
भ्रामक दावों का खंडन
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस घटना को “खनन माफिया” द्वारा की गई सोची-समझी हत्या बताया जा रहा था। साथ ही सरकारी अधिकारियों और खदान मालिकों के बीच मिलीभगत के आरोप भी लगाए जा रहे थे। जिला प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वर्तमान जांच और तथ्यों के अनुसार इन दावों का कोई आधार नहीं है। घटना के अगले ही दिन (13 मई को) निवासी उपजिल्हाधिकारी, जिला खनिकर्म अधिकारी और नायब तहसीलदार समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद मौके का दौरा कर जानकारी जुटाई है।
अवैध खनन पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने साफ किया है कि वे नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पूरी सख्ती से काम कर रहे हैं। जिला और तालुका स्तर पर फ्लाइंग स्क्वाड लगातार सक्रिय हैं। प्रशासन की पारदर्शिता को साबित करने के लिए पिछले पांच वर्षों की कार्रवाई का ब्योरा भी साझा किया गया है:
भारी जुर्माना वसूला: अवैध परिवहन और उत्खनन के 625 मामलों में अब तक 2907.88 लाख रुपये का जुर्माना वसूला जा चुका है।
अतिरिक्त खनन पर शिकंजा: ईटीएस (ETS) तकनीक से नाप-जोख कर अतिरिक्त खनन के 63 मामलों का खुलासा किया गया और 1963.25 लाख रुपये की वसूली की गई।
प्लांट्स किए गए सील: बिना लाइसेंस चल रहे 69 क्रेशर प्लांट और 37 आरएमसी (RMC) प्लांट को सील कर 28 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
ताजा कार्रवाई: 1 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच वाडा और विक्रमगढ़ की 72 खदानों की ईटीएस तकनीक से जांच की गई है। अन्य इलाकों में भी जांच जारी है। वैतरणा, शिरगाव, परगाव जैसी जगहों पर रेत चोरी के खिलाफ लगातार मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
प्रशासन ने बताया कि अकेले वर्ष 2024-25 में अवैध उत्खनन के मामलों में 628.98 लाख रुपये और वर्ष 2025-26 में 1310 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसकी वसूली प्रक्रिया जारी है।
पालघर जिला प्रशासन का संदेश:
प्रशासन ने झूठी और अफवाह फैलाने वाली खबरों के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। जिला प्रशासन ने दोहराया है कि वे सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को पारदर्शी तरीके से बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।







