मनोर, (प्रतिनिधि):
क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती महोत्सव के आयोजन की तैयारियों को लेकर मनोर में गुरुवार, दिनांक 16 सितंबर को बिरसायत भवन में एक भव्य योजना बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में आदिवासी एकता मित्र मंडल के महिला और पुरुष कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बैठक का माहौल उत्साह, एकता और जनभावनाओं से ओतप्रोत रहा।
राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई जाएगी 150वीं जयंती
भगवान बिरसा मुंडा की जयंती इस वर्ष 15 नवंबर को 150वें वर्ष के रूप में मनाई जाएगी। भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक दिन को “राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में घोषित किया है।
मनोर में यह दिवस हर वर्ष अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गौरव के साथ मनाया जाता रहा है। परंतु इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप में किया जा रहा है।
जिलास्तरीय सप्ताहभर चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तय
योजना बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष का “क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा जयंती महोत्सव” एक सप्ताह तक जिलेभर में मनाया जाएगा।
इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक, वैचारिक, सामाजिक और प्रेरणादायी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनका उद्देश्य जनजातीय समाज के गौरवपूर्ण इतिहास, संस्कृति और भगवान बिरसा मुंडा के विचारों का प्रसार करना रहेगा।
भगवान बिरसा मुंडा का संदेश जनजाती स्वाभिमान का प्रतीक
भगवान बिरसा मुंडा ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के आरंभिक दौर में आदिवासी समाज को संगठित कर अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध संघर्ष किया था।
उनका जीवन संघर्ष, आत्मबल और त्याग का प्रतीक रहा है।
यही कारण है कि आज भी वे जनजातीय स्वाभिमान के प्रतीक और “क्रांतिसूर्य” के रूप में पूजे जाते हैं।
एकता और जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण
मनोर में आयोजित यह बैठक न केवल एक उत्सव की योजना थी, बल्कि जनजाती समुदाय की एकता, जागरूकता और सामाजिक संकल्प का प्रतीक भी रही।
महिला कार्यकर्ताओं की सक्रिय उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि बिरसा मुंडा का आदर्श केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी समाज के विकास का मार्गदर्शन करता है।
समापन विचार :
मनोर में संपन्न यह योजना बैठक आने वाले राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के लिए एक सशक्त शुरुआत साबित हुई है।
यह आयोजन केवल स्मरण मात्र नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने की एक प्रेरणादायक पहल है।







