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पालघर: मनोर को अलग ‘तालुका’ बनाने की मांग, भाजपा प्रदेश सचिव संतोष जनाठे ने राजस्व मंत्री को सौंपा पत्र

On: Thursday, May 7, 2026 9:43 PM
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पालघर: पालघर जिले के विकास और प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाने के लिए मनोर क्षेत्र को स्वतंत्र ‘तालुका’ घोषित करने की मांग की गई है। भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश सचिव श्री संतोष आनंदी शिवराम जनाठे ने इस संबंध में राज्य के महसूल (राजस्व) मंत्री श्री चंद्रशेखरबावनकुळे को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी मांग प्रस्तुत की है।

क्यों जरूरी है मनोर तालुका?
संतोष जनाठे द्वारा सौंपे गए पत्र में मनोर को तालुका बनाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए गए हैं:

समय की बचत: वर्तमान में पालघर तालुका का पूर्वी हिस्सा काफी दुर्गम है। यहाँ के ग्रामीणों को सरकारी कामों के लिए तालुका मुख्यालय पहुँचने में1 से 2.30 घंटे का समय लग जाता है। मनोर तालुका बनने से यह दूरी कम हो जाएगी।

भौगोलिक स्थिति: इस क्षेत्र में किसान, मजदूर और आदिवासी समाज की बड़ी आबादी रहती है। दुर्गम इलाका होने के कारण इन्हें प्रशासनिक सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है।

मुख्य केंद्र: मनोर पहले से ही एक प्रमुख बाजार है। मनोर पुलिस स्टेशन के दायरे में करीब 70 गांव आते हैं। इसके अलावा वाडा और विक्रमगढ़ तालुका के कई गांव भी अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं और बाजार के लिए मनोर पर ही निर्भर हैं।

120 गांवों को मिलेगा लाभ
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मनोर और उसके आसपास के 100 से 120 गांवों को मिलाकर नया तालुका बनाया जाना चाहिए। यह मांग पिछले कई वर्षों से लंबित है। संतोष जनाठे ने राजस्व मंत्री से विनम्र विनती की है कि इन गांवों के नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए मनोर को जल्द से जल्द तालुका घोषित किया जाए।
इस लिखित प्रस्ताव के बाद, प्रशासन स्तर पर इस पर विचार होने की प्रतीक्षा है ताकि स्थानीय लोगों को लंबी दूरी तय करने और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से राहत मिल सके।

ब्यूरो: हिंद आवाज मीडिया

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