
| हिंद आवाज डेस्क | पालघर | 26 जून 2026 |
पालघर: क्या प्रशासनिक सुधार जनता के लिए ‘सुविधा’ बन रहे हैं या ‘आफत’? पालघर जिले में बोईसर अपर तहसील के गठन की घोषणा के बाद से ही मनोर और लालोंडे सर्कल के गाँवों में गहरा आक्रोश फैल गया है। प्रशासन की ओर से इन 43 गाँवों को बोईसर से जोड़ने का जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसे ग्रामीणों ने सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘अव्यावहारिक’ और ‘थोंपा हुआ फैसला’ करार दिया है।
दूरी का गणित: विकास या ग्रामीणों की बर्बादी?
आंकड़ों और भौगोलिक स्थिति पर गौर करें तो, मनोर और लालोंडे सर्कल के ये गाँव लंबे समय से पालघर मुख्यालय से प्रशासनिक रूप से जुड़े हुए हैं और भौगोलिक दृष्टि से भी यहाँ की दूरी और परिवहन व्यवस्था यहाँ के निवासियों के लिए अनुकूल रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बोईसर अपर तहसील के गठन से गाँवों की दूरी तो बढ़ेगी ही, साथ ही यातायात के साधनों के अभाव में आम जनता को भारी आर्थिक और शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
ग्राम पंचायतों का फूटा गुस्सा, ‘पालघर’ से ही नाता रखने की जिद
क्षेत्र के प्रभावशाली सरपंचों, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और जागरूक नागरिकों ने एक सुर में कहा है, “हम प्रशासन का सम्मान करते हैं, लेकिन जनविरोधी निर्णयों का नहीं। हमारा तालुक्का पालघर ही है, और हम किसी भी कीमत पर अपनी प्रशासनिक पहुँच को दूर नहीं होने देंगे।”
नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने उनकी इस वाजिब मांग को नजरअंदाज किया, तो यह गाँवों की जमीनी समस्याओं के प्रति सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाएगा।
7 जुलाई 2026: एक अंतिम अवसर
इस पूरे मामले में अब ‘आर-पार’ की स्थिति बन गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा दी गई 7 जुलाई 2026 की समय-सीमा को एक ‘अंतिम चेतावनी’ के रूप में लिया है। सभी 43 गाँवों के नागरिकों ने निर्णय लिया है कि वे सामूहिक रूप से जिला प्रशासन को अपनी लिखित आपत्ति सौंपेंगे।
प्रशासन के सामने उठ रहे ये मुख्य सवाल:
- क्या यह प्रस्ताव तैयार करने से पहले प्रभावित गाँवों की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति का जमीनी सर्वेक्षण किया गया?
- क्या परिवहन की कमी के बावजूद इन गाँवों को बोईसर से जोड़ना, नागरिकों के लिए ‘सुगम प्रशासन’ के वादे का उल्लंघन नहीं है?
- ग्रामीणों के स्पष्ट विरोध के बावजूद प्रशासन अपनी जिद पर क्यों अड़ा है?
आंदोलन की रूपरेखा तैयार
हिंद आवाज मीडिया से बात करते हुए स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में चुप्पी साधने वाले नहीं हैं। आगामी दिनों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से विरोध प्रस्ताव पारित कर इसे राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों तक भेजने की तैयारी है।
अपील:
अपने हक़ की लड़ाई के लिए जागरूक बनें। 7 जुलाई से पहले अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराएं और इस प्रशासनिक बदलाव को रोकने के लिए अपनी आवाज को और अधिक मुखर करें।
जुड़े रहें ‘हिंद आवाज मीडिया’ के साथ, हम पहुंचाएंगे आपकी आवाज सीधे सत्ता के गलियारों तक।







