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झरनों से लेकर ग्रामीण रास्तों तक: जिला कलेक्टर ने जव्हार और मोखाडा के विकास को दी नई दिशा

On: Sunday, June 14, 2026 10:46 AM
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पालघर:

हरे-भरे मैदानों और गहरी घाटियों के बीच रोमांच का अहसास कराती एक ज़िपलाइन, एक भव्य झरने के ठीक ऊपर हवा में तैरता कांच का पुल (स्काईवॉक), आदिवासी गांवों की संस्कृति की झलक दिखाते ‘होमस्टे’ (आवास गृह) और सुदूर इलाकों को मुख्य सड़कों से जोड़ते नए रास्ते—ये कुछ ऐसी बेहतरीन योजनाएं हैं, जो जल्द ही जव्हार और मोखाडा में हकीकत बनने जा रही हैं। पालघर की जिला कलेक्टर डॉ. इंदु रानी जाखड़ के एक बड़े जमीनी दौरे के बाद इस पूरे आदिवासी क्षेत्र की सूरत बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
इस विशेष दौरे में उनके साथ जव्हार के एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP) के सहायक कलेक्टर डॉ. अपूर्व बासुर सहित वन विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD), जिला परिषद और महिला एवं बाल विकास विभाग के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद थे। पूरी टीम ने मिलकर क्षेत्र की नई पर्यटन और विकास योजनाओं का बारीकी से जायजा लिया।

पर्यटन का मतलब केवल घूमना नहीं, बल्कि एक पूरा अनुभव है

कासाटवाड़ी गांव में जल्द ही लगभग 1.2 करोड़ रुपये की लागत से एक ‘टू-वे ज़िपलाइन’ परियोजना शुरू होने वाली है। इसका निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि पर्यटन को सफल बनाने के लिए केवल सुंदर जगह होना काफी नहीं है, बल्कि वहाँ आने वाले पर्यटकों को अच्छी सुविधाएं मिलना भी जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले महीने तक शुरू होने वाली इस योजना में पर्यटकों की सुरक्षा का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाए। साथ ही वहाँ साफ-सुथरे शौचालय, बैठने की जगह और खाने-पीने के अच्छे इंतजाम किए जाएं।
इसके बाद अधिकारियों की टीम मशहूर दाभोसा जलप्रपात (झरने) पहुंची। यहाँ करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से एक शानदार कांच का पुल (ग्लास स्काईवॉक) बनाने की योजना है। दाभोसा को जिले की सबसे बड़ी पहचान बताते हुए डॉ. जाखड़ ने लोक निर्माण विभाग को इसे ‘बनाओ-चलाओ-सौंपो’ (BOT) मॉडल पर विकसित करने के निर्देश दिए। इस योजना में बड़ी पार्किंग, टिकट काउंटर, वेटिंग रूम, फूड कोर्ट, पर्यटकों के बैठने के लिए छोटे मंडप और शौचालय जैसी सभी जरूरी सुविधाएं शामिल होंगी। साथ ही, झरने के नीचे उतरने वाले लोगों के लिए रास्ते में आराम करने और पानी-नाश्ते की व्यवस्था भी की जाएगी।

हकीकत जानने के लिए चार किलोमीटर की पैदल यात्रा

कोंगडा से खैरमाल के बीच टूटी और कटी हुई सड़क की वजह से स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कत होती है। इस जमीनी हकीकत को खुद समझने के लिए कलेक्टर और उनकी पूरी टीम ने अपनी गाड़ियों को छोड़ दिया और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए खैरमाल गांव तक लगभग चार किलोमीटर की पैदल यात्रा की।
इस इलाके की प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि यहाँ के पारंपरिक आदिवासी घरों को ‘होमस्टे’ में बदला जाए, जिससे पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति का अनुभव मिले और स्थानीय लोगों को रोजगार। इसके अलावा, उन्होंने गांव की जर्जर हो चुकी सरकारी आंगनवाड़ी की इमारत को तुरंत ठीक करने और किराए के कमरे में चल रहे केंद्र को सरकारी भवन में शिफ्ट करने के आदेश दिए।
गाँवों को आपस में जोड़ने के लिए जव्हार पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर को गेटपाड़ा-आयारे मार्ग पर एक नया पुल बनाने का प्रस्ताव जिला योजना समिति को भेजने का निर्देश दिया गया है।

पुराने ढांचों की मरम्मत को प्राथमिकता

वन विभाग द्वारा बनाए गए पानी के बांधों की समीक्षा करते हुए डॉ. जाखड़ ने साफ कहा कि नए बांध बनाने से पहले पुराने बांधों और ‘चेक डैम’ की मरम्मत की जाए। मानसून से पहले अगर इन बांधों की सफाई और गाद निकालने का काम पूरा हो जाएगा, तो पानी रोकने की क्षमता बढ़ेगी और इसका सीधा फायदा स्थानीय किसानों को मिलेगा।
लघु सिंचाई विभाग और जल संरक्षण विभाग को भी यही निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आगे चलकर ऐसी परियोजनाएं बनाने का सुझाव दिया, जहाँ पुल और बांध दोनों एक साथ बन सकें, जिससे पानी भी बचे और रास्ता भी आसान हो।

जनता के द्वार तक सरकारी सेवाएं

मोखाडा के नागरिकों को अब छोटी-छोटी सरकारी सुविधाओं के लिए दूर नहीं भटकना पड़ेगा। कलेक्टर ने तहसील कार्यालय के अंदर एक नए आधार और महा ई-सेवा केंद्र की शुरुआत की है। इस केंद्र के खुलने से अब सुदूर ग्रामीण इलाकों के लोग आसानी से अपना आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनवा सकेंगे।

साफ-सुथरा और प्लास्टिक-मुक्त पर्यटन

जव्हार के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘हनुमान पॉइंट’ पर कलेक्टर ने साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया। उन्होंने नगर पालिका को निर्देश दिए कि यहाँ कचरा प्रबंधन को मजबूत किया जाए और जगह-जगह सूचना बोर्ड लगाए जाएं। इसके साथ ही पूरे जव्हार शहर को साफ रखने और प्लास्टिक के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाने की बात कही।

सड़कों का जाल, विकास का आधार

यह मानते हुए कि मानसून के दौरान कई गांवों का संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है, कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जिले की सभी कटी हुई और कच्ची सड़कों को जोड़ने के लिए एक पक्की योजना तैयार करें। इसके साथ ही, ऐतिहासिक महत्व वाले ‘भोपटगढ़’ किले को भी पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए एक विशेष विकास योजना बनाने को कहा गया है।
‘जव्हार कैंपिंग’ से आदिवासियों को मिल रही नई पहचान

दौरे के आखिरी पड़ाव में टीम धापरपाड़ा में चल रही ‘जव्हार कैंपिंग’ देखने पहुंची। आदिवासी विकास विभाग की मदद से एक स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा शुरू की गई यह पहल काफी सफल हो रही है। ऑनलाइन बुकिंग के जरिए यहाँ मुंबई, नासिक और गुजरात से बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं। इस सफलता को देखते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि यहाँ की सड़कों को और बेहतर किया जाए तथा कैंपिंग के लिए आने वाले लोगों को बेहतरीन सुविधाएं दी जाएं।

जव्हार और मोखाडा के लिए एक बड़ा सपना

इस पूरे दौरे का मुख्य उद्देश्य पर्यटन के जरिए स्थानीय लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाना था। कलेक्टर ने सभी सरकारी विभागों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे मिलकर जव्हार और मोखाडा को महाराष्ट्र का सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल बनाएं।
‘धरती आबा जनजातीय’ योजना के तहत पर्यटन स्थलों के पास के गाँवों को ‘होमस्टे क्लस्टर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे सैलानियों को रहने की अच्छी जगह मिलेगी और आदिवासी परिवारों की कमाई का एक पक्का जरिया बनेगा।
यह दौरा सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि एक ऐसी दूरगामी सोच का हिस्सा था जहाँ पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना पर्यटन, अच्छी सड़कें और रोजगार एक साथ आगे बढ़ें, ताकि जव्हार और मोखाडा का भविष्य उज्ज्वल और समृद्ध हो सके।

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