पालघर, वाडा‑खडकोना |”
जय अंबे मंदिर धाम में 27 जनवरी को सम्पन्न 12‑घंटे लगातार भंडारा कार्यक्रम का समापन अत्यंत अनुशासित, शांतिपूर्ण और प्रभावशाली रूप से हुआ। इस भंडारे का संचालन दोपहर 12:00 बजे दिन से रात्रि 12:00 बजे तक निरंतर जारी रहा, जो कि सेवा‑भाव, भक्ति और समाजसेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण साबित हुआ।

भंडारा कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और श्रद्धा, अनुशासन तथा सामाजिक समरसता की भावना के साथ भोजन ग्रहण किया। स्वयंसेवकों ने पूरी तत्परता से भोजन वितरण, प्रसाद व्यवस्था और आयोजन प्रबंधन सुनिश्चित किया, जिससे संपूर्ण कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ।
यह आयोजन जल्दी से जल्दी सम्पन्न होने वाला भंडारा नहीं, बल्कि समय‑बद्ध सेवा‑कार्य का एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक उत्सव सिद्ध हुआ, जिसने स्थानीय समुदाय में सौहार्द, सहयोग भावना और आध्यात्मिक चेतना को मजबूती प्रदान की।
9‑दिवसीय नवरात्रि चंडी यज्ञ‑हवन पूजा का सम्मिलित प्रभाव
भंडारे से पहले जय अंबे मंदिर धाम में नवरात्रि के 9 दिनों तक चंडी यज्ञ‑हवन तथा पूजन‑पाठ का भव्य आयोजन पारंपरिक विधि विधान के साथ किया गया। इस दौरान प्रतिदिन सुबह‑शाम पूजा, मंत्रजप, आहुति और हवन का क्रम चलता रहा और देवी दुर्गा के नौ रूपों का विधिवत पूजन किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि पूजा‑हवन में देवी की सारी शक्तियों का अभिषेक और आह्वान किया जाता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति, मन की शांति, बाधाओं का नाश और समृद्धि की प्राप्ति होती है। हिन्दू परंपरा के अनुसार यह उत्सव नौ रातों तक चलता है और अंतिम दिन विजयादशमी पर समाप्त होता है, जिसमें चंडी पाठ, यज्ञ‑हवन तथा आरती का विशेष महत्व है।
समापन की आध्यात्मिक और सामाजिक उपलब्धि
27 जनवरी के कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंदिर व्यवस्थापक अध्यक्ष श्री विनोद पारसनाथ सिंह ने कहा कि यह आयोजन भक्ति ही नहीं, सेवा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और सहयोगियों को धन्यवाद दिया और कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज के कल्याण और सामूहिक सामंजस्य को प्रेरित करेंगे।
इस कार्यक्रम का समापन इस बात का प्रतीक है कि आस्था केवल पूजा‑पाठ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज सेवा, अनुशासन और सकारात्मक सामूहिक सहभागिता के द्वारा इसका वास्तविक रूप सामने आता है।








