शनि शिंगणापुर मंदिर ट्रस्ट और ग्रामसभा ने 1 मार्च 2025 से शनि देव की शिला पर केवल ब्रांडेड खाद्य तेल से ही अभिषेक करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य शिला की सुरक्षा और संरचना को बनाए रखना है, क्योंकि मिलावटी तेलों में मौजूद हानिकारक तत्व शिला को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
400 वर्षों से चली आ रही परंपरा
शनि शिंगणापुर में शनि देव की शिला पर तेल चढ़ाने की परंपरा लगभग 400 वर्षों से चली आ रही है। श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आकर शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए तेल अर्पित करते हैं। हालांकि, समय के साथ विभिन्न प्रकार के तेलों के उपयोग से शिला की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई थी, जिसे ध्यान में रखते हुए यह नया निर्णय लिया गया है।
मिलावटी तेलों पर प्रतिबंध
मंदिर ट्रस्ट और ग्रामसभा ने स्पष्ट किया है कि अब केवल ब्रांडेड खाद्य तेल से ही अभिषेक किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपयोग किया जाने वाला तेल शुद्ध और मिलावट रहित हो, श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए तेल की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। यदि तेल की गुणवत्ता पर संदेह होता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा या फिर भारतीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
स्थानीय व्यापारियों का समर्थन
स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “पहले हमारे लिए भगवान हैं, अगर भगवान नहीं तो कुछ नहीं। हम अपने खाने के लिए अच्छे तेल का इस्तेमाल करते हैं, तो भगवान के अभिषेक के लिए भी शुद्ध तेल का उपयोग करना उचित है।”
तेल निस्तारण की प्रक्रिया में बदलाव नहीं
वर्तमान में शिला पर चढ़ाए गए तेल को 20,000 लीटर की टंकी में संग्रहित किया जाता है। इस तेल के निस्तारण के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें व्यापारी से यह बांड लिया जाता है कि यह तेल खाद्य उपयोग के लिए नहीं होगा और इसे बायप्रोडक्ट्स के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ब्रांडेड खाद्य तेल के उपयोग के बाद भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
शिला की दीर्घकालिक सुरक्षा पर जोर
मंदिर प्रशासन ने कहा है कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य शनि देव की शिला की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। श्रद्धालुओं को नए नियमों के अनुरूप अभिषेक करने की सलाह दी जा रही है ताकि परंपरा को संरक्षित रखते हुए शिला को भी सुरक्षित रखा जा सके।







