पालघर विशेष संवाददाता:
31 अगस्त तक काम खत्म करने की आखिरी तारीख
पालघर जिले में जंगल (वन) की जमीनों का ब्योरा सरकारी कागजों—यानी 7/12 (सात-बारा) पर्चे—पर दर्ज करने का काम 31 अगस्त तक हर हाल में पूरा करने का सख्त आदेश दिया गया है। सरकारी नियमों के मुताबिक यह काम जून महीने के अंत तक ही पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन बारिश और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के कारण इसमें देरी हो गई। अब जिला प्रशासन ने वन विभाग को साफ कह दिया है कि 25 अगस्त को हुई समीक्षा बैठक के बाद अब कोई ढील नहीं दी जाएगी। 31 अगस्त तक काम पूरा करके इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को जमा करनी होगी।
कागजों की गड़बड़ी सुधारना क्यों है जरूरी?
जमीन किसकी है और उस पर किसका हक है, इसका हिसाब राजस्व विभाग के 7/12 (सात-बारा) कागज से चलता है। वहीं, जंगल की जमीन का हिसाब वन विभाग अपने अलग रजिस्टर (फॉर्म नंबर 1) में रखता है। जब इन दोनों विभागों के कागजों में अंतर होता है, तो कई समस्याएं खड़ी हो जाती हैं:
- अवैध कब्जे का खतरा: जंगल की जमीन पर गलत तरीके से कब्जे (अतिक्रमण) का डर बना रहता है।
- कोर्ट-कचहरी के चक्कर: जमीन के मालिक और सरकार के बीच कानूनी विवाद खड़े होते हैं और मामले अदालत तक पहुंच जाते हैं।
- सरकारी योजनाओं में रुकावट: जमीनों की सही जानकारी न होने से विकास कार्य अटक जाते हैं।
इन्हीं समस्याओं को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए सरकार इस काम को प्राथमिकता दे रही है।
अधिकारियों की टीम मिलकर कर रही है काम
सरकार के आदेश के अनुसार, जमीन का सर्वे नंबर देखकर यह तय किया जा रहा है कि कौन-सी जमीन किस तरह के जंगल में आती है। इसके लिए वन विभाग, तहसील और भूमि अभिलेख (जमीन के नक्शे रखने वाला विभाग) के अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं। इन सभी विभागों की टीम गांव-गांव जाकर 7/12 के कागजों में सही और सटीक जानकारी दर्ज कर रही है।
अधिकारियों पर प्रशासन का कड़ा पहरा
काम में किसी भी तरह की ढिलाई न हो, इसके लिए जिले के बड़े अधिकारियों (जिलाधिकारी और निवासी उप-जिलाधिकारी) ने लगातार बैठकें ली हैं।
- चार बड़ी बैठकें: 10 जून, 25 जून, 30 जुलाई और 25 अगस्त को अधिकारियों की लगातार बैठकें ली गईं।
- सख्त चेतावनी: अधिकारियों को साफ बता दिया गया है कि अगर 31 अगस्त की समय-सीमा तक काम पूरा नहीं हुआ, तो इसे बेहद गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
आम जनता और जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?
- एनओसी (NOC) के चक्कर से मुक्ति: अभी जमीन जंगल के पास होने पर हर छोटे-बड़े काम के लिए वन विभाग से ‘ना-हरकत प्रमाण पत्र’ (NOC) लेना पड़ता था। अब कागजात साफ होने से यह बार-बार का चक्कर खत्म हो जाएगा।
- सरकारी मंजूरी में आसानी: जमीन का मालिक अपनी जमीन का क्या इस्तेमाल कर सकता है, यह पूरी तरह साफ हो जाएगा। घर बनाने या व्यापार शुरू करने के लिए सरकारी परमिशन बहुत जल्दी मिलेगी।
- जंगलों की सुरक्षा: जंगल की जमीन पर कोई गलत कब्जा नहीं कर पाएगा और पर्यावरण की सुरक्षा भी बनी रहेगी।
जिला प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ इस बात पर नजर रखे हुए है कि 31 अगस्त तक यह काम पूरी तरह खत्म हो जाए।




